Vastu for Bedroom

Vastu for Bedroom

Vastu For BedRoom
Vastu For BrdRoom By Ketan Astrologer

Bed room is supposed to be a place for romance and relaxation. Vastu says that the bedroom should be as far away from North and East direction as possible. The more you are closer to South and west, more you will find peace and comfort. That is why southwest or south area is best suited for a master bedroom.

Never place your head towards north while sleeping like poles repel each other. It should be towards south, as it ensures good health and peaceful sleep. Placing your head in east or west is also beneficial depending upon the location of doors, window and toilets. Maximum furniture should be kept on south and west side of the bedroom.

VastuKA
Vastu For Bedroom

Preferably, there should not be any reflective surface in bedroom to ensure harmonious family life and better health. In case, there is no other option but to have a mirror/ T.V./ Computer etc, place it in such a way that it does not reflect the bed or you can cover the mirror with cloth before going to sleep.

Ideal colors for bedroom walls are off white, light yellow, light green or peach. Avoid dark & fluorescent shades.

साप्ताहिक भविष्य 19 नवम्बर से 25 नवम्बर तक

साप्ताहिक भविष्य 19  नवम्बर से 25 नवम्बर तक

 

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horoscope by ketan astrologer

मेष :22मार्च से -21अप्रैल

सेहत केलिए ढीला है ये सपताह, गिरने फिसलने का डर ,कामकाज के लिए बेहतर, शत्रु कमजोर रहेंगे ! 19 -20 को सेहत का ध्यान रखे! 21 -22 को योजनाए सफल होंगी!
23 -24 को शत्रु नुक्सान पहुंचाने की कोशिश करेंगे !

वृष :22 अप्रैल से 21 मई
किसी शत्रु के साथ टकराव के योग,सेहत के लिए अलर्ट रहे, कारोबारी स्थिति संतोषजनक !शनि की ढैय्या से सेहत को नुकसान ! 19-20 को कारोबारी दशा ठीक ठाक किन्तु घरेलू मोर्चा पर टेंशन ! 21-23 तक खान पीना संभल के करे सेहत बिगड़ेगी ! 23 -25 तक इरादों मैं कामयाबी , सामान्य हालत भी सुधरेंगे !

मिथुन : 22 मई से 21 जून
कामकाज के लिए बेहतर ,संतान से सहयोग मिलेगा ! 19-20 नवम्बर को विरोधियो को कमजोर न समझे न ही उन पर विस्वाश करे !21-23 को कामकाज संतोषजनक! पति पत्नी में रिस्ता अच्छा होगा ! 23 -25 नवम्बर तक सेहत का ध्यान रखे पेट का खासकर ध्यान रखे !

कर्क : 22जुन से 21 जुलाई
विराधियों से मन टेंस , अपसेट रहेगा, लोहा मसीनरी ,हार्डवेयर का कारोबार करने वालों के लिए दशा अच्छी! 19-20 नवम्बर को मन पर गलत सोच के हावी होने का दर रहेगा, संतान का रवैया भी कुछ उखरा सा रहेगा, 21 से 23 को शत्रु पे नजर रखे 23-25 तक के लिए कारोबार अच्छा!

सिंह : 22 जुलाई से 21 अगस्त
सितारा अदालती कामो को बिगाड़ने और ुश्मनो की सरगर्मी को बढ़ाने वाला है, मगर सामान्य हालत अनुकूल चलेंगे, 19 से 20 नवम्बर को कोर्ट कचिहारी के लिए ढीला, 21 से 23 तक सामन्य हालत बढ़त की ओर 23 से 25 तक शत्रु नुक्सान करने की कोशिश करेंगे !

कन्या: 22अगस्त से 21 सितम्बर
छोटी सोच तथा नेचर वाले किसी साथी से नुक्सान का डर रह सकता है मगर जायदादी कामकाजो के लिए आपकी मेहनत रंग लाएगी ! मान यश की प्रापति !
19 से 20 नवम्बर तक अपनों से सावधान 21से 23 तक जायदादी कामकाजो के लिए समय बेहतर 23 से 25 तक संतान की तरफ से लाभ!

तुला : 22 सितम्बर से 21 अक्टूबर
लेन- देन के कामकाजो में सावधानी बरते , मगर मित्रो से साथियो से सहयोग मिलेगा कामयाबी भी साथ देगी ! सरकारी कामों के लिए स्थिति ख़राब 19-20 को यात्रा से दुरी रखे ! मगर 21 से 23 तक कारोबारी सहयोग देंगे तथा अनुकूल चलेंगे 23 से 25 तक जायदादी कामो को ध्यान से करेंगे!

वृश्चिक :22 अक्टूबर 21 नवम्बर

पर्यटन, कन्सल्टन्सी , मेडिसिन डिजाइनिंग का काम करने वालो के लिए भरपूर लाभ देने वाला समय ! 19-20 नवम्बर को मन व् दिमाग गलत कामों की तरफ बढ़ेगा हर कदम सोच समाज कर रखे 21 से 23 तक धनलाभ तथा कारोबार के लिए अच्छा 23 से 25 तक मेहनत का फल मिलेगा!

धनु :22 नवम्बर से 21 दिसम्बर
किसी पे जयदा भरो न करे न ही दुसरो के काम की जिम्मेदारी ले , सितारा अच्छा प्रभाव बना रहेगा ! साढ़ेसाती उलझन बड़ा सकती है ! 19-20 तक को धन हानि खर्च बढ़ेगा 21 से 23 तक कारोबारी हालत अच्छी रहेगी 23 से 25  व्यापर में हर तरह से लाभ रहेगा !

मकर : 22 दिसम्बर से 21 जनवरी तक
मिटटी ,रेता-बजरी, सीमेंट, भवन निर्माण सामग्री का काम करने वालो के लिए आर्थिक दशा बेहतर पर सावधानी बरते ! परेशानियों को हलके में न ले ! 19-20 को आमदनी का सितारा अच्छा कारोबार में लाभ 21 से 23 तक हर काम में सावधानी रखे सम्बल कर चले कागजी कारवाई में एहतियात बरते23 से 25 तक कामकाजी दशा बेहतर मान समान बढ़ेगा !

कुम्भ: 22 जनवरी से 21 फरवरी
सरकारी कामो के लिए समय ढीला ,खर्चो का दवाब कारोबार के लिए भागदौड़ ज्यादा !19 से 20 तक किसी अफसर के सख्त रुख के कारण सरकारी काम में रुकावट ! 21 से 22 तक सितारा धन लाभ वाला रहेगा कोशिश करने पर कामयाबी भी मिलेगी !23 से 25 तक समय नुकसान परेशानी व् तनाव भरा रहेगा किसी की जिम्मेदारी में न फसे !

मीन : 22फरवरी से 21 मार्च तक
इधर- उधर बेकार कामों की तरफ भटकती बुद्धि को सही दिशा देने की जरूरत राजकीय कामों तथा कारोबारी कामों में कदम बढ़त की ओर ! 19 से 20 को किसी मुश्किल पे पड़ने के योग गलत सोच का प्रभाव रहेगा ! 21 से 23 तक राजकीय कामों में बोलबाला रहेगा !23 से 25 तक आमदन कारोबार में लाभ की सम्भवना !

Pandit ketan bhargav

How to Win Back Lost Love, ex Girl Friend or Wife by mantar

Get Your Love Back

It is the most searched problem over internet that how to win back lost love, girl friend or wife. But it is very important to know about the relationship which links male and female together. One of the hardest things in life is that relationship fades with time. The initial time of friendship and honeymoon gets calmer and everything you had swore to do but fail. Suddenly your life with partner or girlfriend becomes downward spiral. Many couple realizes that after fell in relationship their married or relationship life is facing a problem and they have become a zombie couple who finds discount coupons for home products. Their end of passion is the main catalyst which kills the long term relationship because some kind of boring enters into life.

Sometimes you love to anyone but circumstances make it challenging that relationship does not go further where you want. There can be many other situations which come between lovers. So it is important to understand that what kind of problems creating a gap between relationship like work problem, distance problem, physical problem, financial problem or any other sexual problem.

Now a days, couples take quick decision to split or end their relations without taking a second thought and there could be many reasons. Sometimes one neglects to another or ignore but later everyone regrets. There are many love problems in life which we think it could not be solved but with the help of love  mantras, we can oxygenate dead relationships with pooja even we can get back your lost love or friend. These spells are result oriented if any  specialist astrologer performs it under specified guidelines which is important to reap the benefit from the mantras.

सुबह बिस्तर छोड़ने से पहले करे ये उपाय!!!

सुबह बिस्तर छोड़ने से पहले करे ये उपाय!!!wealth tips

हमारे वेद हमें कुछ अछा करने के लिए कहते है जिसका लाभ मनुष्य उठा सके | इसलिए हमारे ऋषियों ने भी इन् बातो को करने की सलाह दी है.ये सारी बाते करने से मनुष्य को बहुत लाभ होता है| यदि दिन की शुरुआत शुभ हो जाए तो पूरा दिन शुभ रहता है। इसीलिए शास्त्रों में दिन को शुभ बनाने के लिए छोटी-छोटी कई परंपराएं बताई गई हैं। इन्हीं परंपराओं में से एक परंपरा है सुबह उठते ही अपनी हथेलियों को देखना। इस परंपरा से कई लाभ मिलते हैं। यहां जानिए इस परंपरा से जुड़ी खास बातें

कर दर्शनम् परम्परा

सुबह नींद से जागने के बाद सबसे पहले यदि अपने हाथो की हथेलियों को आपस में जोड़कर और किताब की तरह खोल ले | इस मंत्र का जप करे और निचे दिए मंत्र का जाप करे |

मंत्र-

कराग्रे वसते लक्ष्मी: करमध्ये सरस्वती।
करमूले तू गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम ॥

 

अर्थ – मेरे हाथ के आगे वाले भाग में महालक्ष्मी, मध्य भाग में सरस्वती और मूल भाग में भगवन विष्णु का वास है |  मैं इन्हे प्रणाम करता हूँ,इनके दर्शन करता हूँ
हमारी संस्कृति हमें कुछ बढ़िया करने के लिए प्रेरित करती है | जीवन के चार आधार – धरम, अर्थ, काम, और मोक्ष जिन्हे पुरुषार्थ कहा गया है | जो इन् चार आधारो के अनुकूल कार्य करते है उनको प्रभु की विशेष कृपा होती है | इन कर्मो से ही हम अपने जीवन को स्वर्ग बना सकते हैं और नरक भी बना सकते हैं | इन हाथो से ही सभी काम किये जाते है, ये ही पुरुषार्थ है इसलिए इनके दर्शन करके ही उठना चाहिए |

 

सुबह सबसे पहले इन हाथो के दर्शन करके महालक्ष्मी, सरस्वती और भगवन विष्णु की कृपा प्राप्त होती है | माँ लक्ष्मी से धन,माँ सरस्वती से ज्ञान और भगवन विष्णु से सभी सुखो की प्राप्ति होती है | इन् बातो से पता चलता है की कर्म करने से ही इंसान को सफलता मिल सकती है जैसे अथर्वेद में कहा गया है कृतं में दक्षिणे हस्ते जयो में सव्य आहितः 

 

How to Perform Navratri Pooja to Get Wealth,Health and Respect?

maa-nav-durga-happy-navratriNavratri is the most famous Hindu festival which celebrated across Indian and abroad. Navratri means “Nine Nights” and each day belongs to different forms of Goddess Durga .During these days everyone can invoke the internal power to fulfill the wishes and prevent himself from any threat. All devotees beg for wealth and health from the supreme power of world which drives the world.

It is important to celebrate this festival with proper ritual and customs to get blessings from goddess. Get the full Navratri Pooja Vidhi with following things :

Photo of goddess Durga in Room

Red color sari for deity

Book of Durga Sapshati

Holy Ganga Water in Kalash

Mango Leaves

Fresh Green Grass

Chandan Powder

One Coconut

Roli and Moli

Supari & Pan

Cloves

Cardamom

Gulal

To perform Navratri pooja, you need to wake up early in the morning before sunrise. This is the best time to perform religious task like pooja, Every member of family sat together on mat to do the pooja with concentration and offer fresh fruits & flowers to Durga.

How to Achieve Success & Stop Failure in Holy Shravan Maas

How to Achieve Success & Stop Failure in Holy Shravan MaasSOMNATH

Shravan maas has the great importance in Hinduism and significant month of chaturmas, these are the best days to execute religious practices for success. During shravan month, the worship of Lord Shiva gives fruitful results. Especially on Monday every follower perform chants to please Lord Shiva because this day belongs to Lord Shiva and also known as ‘shravan somvar’ .

From the religious point of view this is the month when Lord Shiva highly showers the blessings on their deities. The whole month is devoted to Shiva, the secret lies in the story of ‘Samundra Manthan’. It is believed that during ‘Samundra Manthan’ ,many things came out of it and divided between Devtas and Asuras. But time of poison came out, nobody was ready to show interest in it. Then Lord Shiva, Lords of Lord, steps out and kept the whole poison in their throat. Due to take possession of poison,Lord Shiva’a throat turn into blue since then Lord Shiva also known as Neelkanth Mahadev.

Deities can do different types of Poojas to get blessings of Shiva during shravan maas :

* For successful Marriage

* To remove all kinds of obstacles of business

* To achieve desired success in life and stopping failures.

Shravan month is too much productive and scared for all. If we execute mantras,chants,aradhna and other religious practices of mantra or tantra sadhana then there is no doubt to get desired results will come.

If any bhaktgans install the pard shivlinga and perform the worship in a proper way then he will surely receive the blessings of Lord Shiva.

 

Make Your Life Full of Joy & Happiness With Venus Planet

The planet Venus is connected to the Friday,a fifth day of the week. Venus is called Shukra Hindi and Friday as Shukrawaar because of that association.

Venus, the planet of beautifulness and the symbol of love, is the shinging planet in the sky visible with the naked eye. It is the second planet closest to the sun after Mercury.

According to Vedic texts, It also known as  shukracharya . In holy books it is said to the teacher of the Asurs  . He is also the head master of pranayam and knows the mantra Sanjeevani (a formula that can be used to resurrect the dead).

Venus blesses the natives under their influence with him. Astrologically Venus governs the second and seventh zodiac sign Libra and Taurus. It is grown in Pisces and weakened in the sign of Virgo. Venus is has the characteristics of Cosmic poets, musicians, artists, animators and charming

Basically, the planet Venus is shows the degree of affection, polyphony, beauty and lavishness, Venus is considered as the planet that helps us to present an attractive and refined shape for our self to the outside of world. In astrology is considered as the second best planet after Jupiter. In jyotish, Venus gives the internal sense to praise the beauty and respect the God’s creation.

Venus boosts the morale to fall in love and spread it, and finally realize to us that there is not powerful thing as compared to Love in this universe. In addition to this, this planet tend to fill our life with laugh, warmth, affection, love, understanding, beautifulness and such properties reflects the nature of Venus.It is the strong token of bonds and relationship between humans. Thus, it is the responsible for all gist of heart like love,romance,attraction,compassion,pleasures,gladness and sex.

Venus, reason of relationship, which is known for creating reciprocal feelings of comfort and trust between people. Venus is a responsible to make men and women fall in love which reminds to world that we all are result of its blessing who close to people.

We advise you to do the following to strengthen the Venus in your kundali.

  • Pray to Goddess Lakshmi with proper manners on every Friday.
  • Worship to Maa Durga during weak period of Venus in your Kundali
  • Distribute gifts to young girls on Friday
  • Always respect women to enhance positive influence of Venus.

नाग पूजन का पर्व- नाग पंचमी

श्रावण माह में भगवान की कृपा पाने के लिए लोग पूरा महीना अनेक वर्त,अभिषेक,हवन,यग एव धार्मिक अनुष्ठान करते है| इस बार सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी 1 अगस्त को है जिसे नाग पंचमी के रूप में नाग देवता की पूजा करके मनाया जाता है|
भारतीय संस्कृति में प्रभु द्दारा रचित सारे सृष्टि की रक्षा के लिए अनेक जीवों की विभिन्न प्रकार से बड़े श्रदा भाव से पूजा की जाती है| सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन नागों का पूजन करने का विधान है|ऐसा करके लोग नागदेवता को प्रसन्न करके उणा आशीर्वाद पाते है|नाग भगवान शंकर के आभूषण है तथा उनके गले में लिपटे रहते है| शास्त्रों के अनुशार हमारी पृथ्वी का भर भी शेषनाग के फॅन पर टीका है,भगवान विष्णु तो शेषनाग की शय्या पर क्षीर सागर में श्य्न करते है| मान्यता है की जब जब भगवान ने धरती पर अवतार लिया है शेषनाग भी उनके साथ किसी ना किसी रूप में अवतरित होये है| रामअवतार में वे भाई लक्ष्मण बनकर और कृष्णावतार में वे भाई बलराम बनकर साए की तरह प्रभु के साथ रहे है| वासुदेव जब नन्हे कृष्ण को लेकर गोकुल जाने के लिए यमुना पार कर रहे थे तो भगवान श्रीकृष्ण के सिर पर नागफनों की छाया करके नाग देवता ने ही उन्हे भारी वर्षा से बचाया था| विभूति योग का वर्णन करते होये भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को बताया था की सापों में वासुकी एव नागों मे शेषनाग में मैं हूँ| इससे स्पष्ट है की नाग विभूति योग सम्पन्न है तथा हमारी संस्कृति में उन्हे देवत्त प्राप्त है|
क्यों मनाई जाती है नाग पंचमी
शास्त्रो के अनुसार सावन मास की पंचमी को सभी नाग सृष्टि के रचयता ब्रह्मा जी से मिलने गये थे,तथा उसी दिन उन्हे श्राप से मुक्ति मिली थी| वारा पुराण के अनुसार ब्रह्मा जी ने अपनी कृपा से शेषनाग को अलंकृत किया था| तब से धरती का भार धारण करने की सेवा लेने पर लोगों ने नाग देवता के प्रति आभार व्यक्त करते होये उनका विधिवत पूजन किया तथा उसी परंपरा के अंतरगत् हर साल नाग पंचमी पर नागों की पूजा विधिपूर्वक की जाती है| नागदेवता का आशीर्वाद पाने के इए मंदिरो में नाग पनचमी के दिन नागों की पूजा करने की मान्यता है तथा इस दिन नागमूर्तियों,को पंचामृत से स्नान करने की परम्परा है|
कैसे करें व्रत व पूजन
नाग पंचमी पर न केवल नाग देवता की पूजा की जाती है बलकी घर की सुख समर्द्दि और खुशहाली के लिए लोग नाग पंचमी को व्रत भी रखते है| इस व्रत को पंचमी से एक दिन पहले यानी चतुर्थी के दिन (31 जुलाइ) संकल्प करके एक समय भोजन कर के किया जाता है| पंचमी के दिन उपवास रखे, गरुड़ पुराण के अनुसार व्रती अपने घार के मुख्य द्दार के दोनो और गोबर से फनियर नागों के चित्र बनाए तथा आटे अथवा मिट्टी के साप बनाकर उन्हे विभिन्न रंगों से सजाए तथा उनका विधिवत सफेद कमाल के पुष्पों से पूजन करे|
पंचम तिथि का स्वामी नाग माना जाता है इसलिए नाग पंचमी के दिन धूप,दीप,खीर,भीगे होये बाजरे ,गीयी व नेवेध आदि से “नागरजाय नम:” मंत्र का उच्चारण और नाग्स्तोत्र का पाठ करते होये नाग देवता का पूजन करना चाहिए| उस दिन गेहूँ,भुने होये चने और जौ का प्रसाद नागों को चडाएँ तथा आप भी इन्ही चीज़ो का भोजन करें और प्रसाद के रूप में वितरण करें|नागों को भोजन कराने के उद्देशय से ब्रहमणो और सन्यासियों को भोजन कराए तथा सापों में जाकर दूध से नागदेवता का अभिषेक करे उन्हे मीठा दूध पिलाने के लिए रखे|
कर्मकांडों में किसी नये भवन निर्माण आदि का शिलान्यास करने में नागदेवता का पूजन वास्तु देवता के रूप में भी किया जाता है|जिन जातकों की कुंडली में कालसर्पदोष है तथा जिनके राहु , केतु का दोष है, नाग देवता की पूजा करके उन्हे प्रसन्न कर सकते है|

चतुर्मास का माहात्म्य

आषाढ़ माह में देव्स्यन एकादशी से कार्तिक माह में हरी प्रबोधिनी एकादशी अर्थात आषाढ़ शुक्ल एकादशी तक चार माह श्रावण,भाद्रपद,आस्विनि व कार्तिक माह को चतुर्मास कहते है|चतुर्मास में आधे से अधिक मुख्य त्यौहार पड़ते है| मुख्य पर्व : गुरु पूर्णिमा,नाग पंचमी, कृष्ण जन्माष्टमी,रक्षा बंधन,हरीतीज़,गणेश च्तुर्थी,श्राद्द,नवरात्रि,दशहरा,शरद पूर्णिमा,करवाचौथ,आहोई अष्टमी,धनतेरस,दीपावली,गोवर्धन ,भैयादूज व छठ पूजन|श्रावणमाह में पूर्णिमा के दिन चंद्रमा श्रावण नक्षत्र में होता है ,इसलिए इस माह का नाम श्रावण है|यह माह अति शुभ माह माना जाता है|इस माह में प्रत्येक् सोमवार को श्रावण सोमवार कहते है| इस दिन विशेष रूप से शिवलिंग पर जल चढ़ाया जाता है| कहते है श्रावण मास में ही समुंदर मंथन से ही 14 रतन प्राप्त होये थे जिसमे एक था हलाहल विष| जिसको शिवजी ने अपने गले में स्थापित कर लिया था जिससे उनका नाम नीलकंठ पड़ा|विष के जलन को रोकने के लिए सब देवताओं ने उन पर गंगा जल डाला| तभी से श्रावण मास में श्रद्दालु तीर्थ स्थल से गंगाजल लाकर शिव जी पर डालते है|कहते है की उतरायण के 6 माह देवताओं के लिए दिन होते है और दक्षिणायन के 6 माह उनके लिया रात होती है| ये चार माह भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते है| अत: सभी संत इस समय में व्रत का पालन करते है| इस समय ब्रहम्चर्य का पालन करते होये तामसिक वस्तुओं का त्याग किया जाता है | चार माह ज़मीन पर सोते होये भगवान विष्णु की आराधना की जाती है|विष्णु सहस्रनां का पाठ किया जाता है|पुराणो में ऐसा उल्लेख है की इस दिन से भगवान विष्णु चार माह की अवधि तक क्षीर सागर की अनंत शय्या पर शयन करते है|इसलिए इन चार माह में कोई भी धार्मिक काम ना किया जाता है| ईयेज़ अवधि में कृषि और विवाह सभी शुभ कार्य नही होते| इन चार माह में सभी देव एकत्रित होकर ब्रज भूमि में निवास करते है|कुछ लोगो का ऐसा भी मानना है की  चतुर्मास में वर्षा का मौसम हाओटा है|कहते है की इन दिनों स्नान अगर किसी तीरथ स्थल या पवित्र नदी में किया जाए तो वह विशेष रूप से शुभ होता है| स्नान पश्चात श्री विष्णु जी का पूजन करना चाहिए| इसके लिए  के उपर लाल रंग के वस्त्र में लिपटे कुंभ रखकर उस पर भगवान की प्रतिमा रखकर पूजा करनी चाहिए| धूप दीप एव पुष्प से पूजा कर ‘नमो नारायण’ या ” उँ नमो भग्व्ते वासुदेवाय” का जप करना चाहिए सभी कष्टों से मुक्ति व मोक्ष मिलता है|चतुर्मास का प्रारभ अर्थात देवसायंन एकादसी व इसका अंतिम दिन हरी प्रबोधिनी दोनो ही दिन अन्बुझ मुहूर्त है कोई भी शुभ कार्य विवाह, ग्रह प्रवेश आदि किए जा सकते है|जो मनुष्य केवल शाकाहार करके चतुर्मास व्यतीत करता है,वह धनी हो जाता है| जो प्रतिदिन तारे देखने के बाद एक बार भोजन करता है , वह धनवान ,रूपवान और गणमान्य होता है| जो चतुर्मास में एक दिन का अंतर करके भोजन करता है,वह बैकुंठ जाने का अधिकारी होता है| जो मनुष्य चतुर्मास में तीन रत उपवास करके चौथे दिन भोजन करता है वह पून्जनम नही लेता| जो पाँच दिन उपवास रख के छठे दिन भोजन करता है उसे राजसूय तथा अश्वमेध यगों का फल मिलता है| जो व्यक्ति भगवान मधुसूदन के सायंकाल में अयाचित अन्न का सेवन करता है उसका अपने भाई बंधुओ से कभी विलाप नही होता| चौमासे में विष्णुसुक्त के मंत्रो में स्वाहा संयुक्त करके नित्य हवन में तिल और चावल की आहूतियाँ देने वाला आजीवन स्वस्थ व निरोगी रहता है| चतुर्मास में प्रतिदिन भगवान विष्णु के समक्ष पुरुषसुक्त का जान करने स बुद्धि कुशाग्र होती है | हाथ में फल लेकर जो  मौन रहकर भगवान नारायण की नित्य 108 परिक्रमा करता है कभी पाप में लिप्त नही होता| चौमासे के चार महीनों में धर्मग्रहंतों के स्वाध्याय से बड़ा फल मिलता है| श्रीहरी के सायंकाल में वैष्णव को अपनी किसी प्रिय वस्तु का त्याग करने से जिस वस्तु को त्यागत है उसे अक्ष्य ऊप मे प्राप्त होता है| चतुर्मास आध्यात्मिक साधना का पर्व है जिसका सदुपयोग आत्मोन्न्ति हेतु करना चाहिए|

विवाह के लिए विशेष म्हत्वपूर्ण गुरु , शुक्र और मंगल

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हमारे शास्त्रों में 16 संस्कार बताए गये है जिनमे विवाह सबसे म्हत्वपूर्ण संस्कार है| हमारे समाज में जीवन को सुचारू रूप से चलाने के लिए और वंश को आयेज बढ़ाने के लिए विवाह करना आवश्यक माना गया है|जब हम कुंडली में विवाह का विचार करते है तो उसके लिए 9 ग्रहों में से सबसे म्हत्वपूर्ण ग्रह गुरु , शुक्र और मंगल का विस्लेश्न करते है| इन तीनों ग्रहों का विवाह में विशेष भूमिका होती है| यदि किसी का विवाह नही हो रहा हो या दांपत्य जीवन टिक नही चल रा हो तो निस्चित रूप से कहा जा सकता है की उसकी कुंडली में गुरु , शुक्र और मंगल की स्थिति ठीक नही है|

गुरु :  वर-वधू की कुंडली में गुरु ग्रह बलि होना चाईए| गुरु की शुभ दृष्टि यदि सप्तम भाव पर होती है तो विवाहिक जीवन में परेशानियों के बाद भी अलगाव की स्थिति नही बनती अर्थात गुरु की शुभता वर-वधू की शादी को बांधें रखता है| गुरु ग्रह शादी के साथ-साथ संतान का कारक भी है| अत: यदि गुरु बलहीन होगा तो शादी के बाद संतान प्राप्ति में भी परेशानी होगी|
अत: हमे कुंडली में मुख्य रूप से गुरु को सबसे पहले देखना चाहिए| गुरु यदि बलि है या उच्च राशि में है, केंद्र या त्रिकोण में है तथा शुभग्रह से प्रभावित है तो जातक के शादी में परेशानी नहीं आती है और जातक की शादी समय से हो जाती है|

शुक्र: गुरु ग्रह जहा शादी करवाते है वहीं शुक्र ग्रह शादी का सुख प्रदान करते है| कई बार देखा गया है की शादी तो समय पर हो जाती है लेकिन पति को पत्नी सुख और पत्नी को पति सुख का अभाव रहता है| किसी न किसी कारण वश पति-पत्नी एक साथ नहीं रह पाते और अगर रहते है तो ब उन्हें श्य्या सुख प्राप्त नही हो पाता| यदि आपके जीवन में ऐसी स्थिति है तो समाज लेना छाईए की आपका शुक्र ग्रह पीड़ित है अर्थात शुक्र पापी ग्रह से पीड़ित और कमजोर है| अत: हमे विवाह का पूर्ण सुख लेने के लिए शुक्र की स्थिति का आकलन जरूर कर लेना चाहिए| शुक्र की शुभ स्थिति दांपत्य जीवन के सुख को प्रभावित करती है अर्थात यदि शुक्र स्व्य हो,उच्च राशि मे स्थित हो,केंद्र या त्रिकोण में हो तब विवाहिक जीवन का शुख प्राप्त होता है| इसके विपरीत जब त्रिक .भाव ,नीच या शत्रु क्षेत्री,अस्त ,पापी ग्रह से दृष्ट अथवा पापी ग्रह के साथ बैठा हो तब दांपत्य जीवन के लिए अशुभ योग बनता है| अत: कुंडली में शुक्र की स्थिति का अवलोकन ज़रूर करना चाहिए|

मंगल: मंगल के अध्ययन किए बिना विवाह के पक्ष से कुंडलियों का अध्ययन अधूरा ही रहता है| वर-वधू की कुंडलियों का विश्लेषण करते समय पहले कुंडली में मंगल की भूमिका का विचार ज़रूर करना चाहिए की मंगल किन भावों में स्थित है कौन से ग्रहों से दृष्टि संबंध बना रहे है तथा किन भावों और ग्रहों पर इनकी दृष्टि है|
मंगल से मांगलिक योग का निर्माण होता है| यदि कुंडलीं में प्रथम ,चतुर्थ,सप्तम,अष्टम और द्वादश भाव में मंगल होता है तो कुंडली मांगलिक कहलाती है क्योंकि इन घरों में बैठकर मंगल सप्तम भाव को प्रभावित करता है|अत: कुंडली में मंगल की स्थिति टिक होनी ज़रूरी है क्योंकि मंगल की अशुभ स्थिति विवाहिक जीवन के सुख में कमी लाता है|