क्या बताता है आपके नाम का पहला शब्द ‘P’ से ‘T’ तक

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क्या बताता है आपके नाम का पहला शब्द ‘P’ से ‘T’ तक

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P ‘ पी ‘- जिन व्यक्तियों के नाम का पहला अक्षर अंग्रेजी के वर्णमाला का ‘पी’ होता है उनके अंतर्मन में भयंकर टूटन व् हाहाकार होता है, पर कष्ट होने पर भी वे ऊपर शांत बने रहते है, कभी उद्दिग्न होते देखे नहीं जाते । अपने कष्टों और रहस्यों को छिपाते हुए वे दुसरो के सुख-दुःख में भाग लेना नहीं भूलते । उनके मन में किसी के प्रति कुतस्ति विचार नहीं होते, साथ ही किसी की निंदा करना भी पसंद नहीं करते । भीतर से साफ़ और और बाहर से मधुर एंव मिलनसार होना उनके व्यक्तित्व की विशिष्टता होती है । अनेक कठिनाइयों झेलने पर भी लोग उन्हें मुँह लटकाये नहीं देखते । उनके चेहरे पर दुःख दर्द और चिंता- विषाद की रेखाएं देखने में नहीं आते । स्वय कष्ट और हानि सहकर भी ऐसे व्यक्ति अपने मित्रो की सहायता करने और उन्हें सहयोग देने के लिए तैयार रहते है ।इन्हे सदा शांत वातावरण पसंद होता है । कोलाहल से भी भरे वातावरण में भी ये अपने को ऐसा बना लेते है मनो किसी अज्ञात स्थान पर रह रहे होते है । इन्हे समाज का श्रेष्ट मानव भी कह सकते है ।



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‘क्यू’ अक्षर की अंक संख्या एक है
Q (क्यू )- जिन व्यक्तियों का नाम अंग्रेजी के क्यू अक्षर से आरंभ होता है उनका जीवन काफी व्यवस्थ्ति होता है ।उनके जीवन -सिद्धांत और लक्ष्य भी निश्चित और निर्धारित होते है ।इसका अर्थ ये है की उनके विचार और सिद्धांत अटल व् अडिग होते है ।उनका जीवनक्रम सुव्यवस्थित होता है ुर उनमे उतावलापन नहीं होता ।अपनी व्यवस्था में किसी दूसरे का हस्तक्षेप उन्हें पसंद नहीं होता । ऐसे व्यक्ति श्रेष्ट प्रशासक सिद्ध होते है परन्तु उनमे अभिमान नहीं होता । अपने उत्तरदायित्व को भी वे अछि तरह निभाते है । जीवन की व्यवस्था और सिद्धांत ही ऐसे व्यक्तियों की विशेषता कही जा सकती है ।

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‘आर ‘ अक्षर की अंक संख्या दो है
R (आर ) – जिन व्यक्तियों के नाम का पहला अख्सर अंग्रेजी के वर्णमाला का आर होता है ।वे चाहे तो अपरिचित को भी थोड़ी – सी देर में मित्र बना लेते है । अपने इसी गुण के कारण किसी भी उच्चाधिकारी से अपना काम निकलवा लेना उनके लिए अत्यंत सरल होता है ।इसी कारण ऐसे व्यक्ति साधारण स्तर से उच्च स्तर तक पहुँच जाते है । ऐसे व्यक्ति गुणग्रहक भी होते है । इन्हे किसी व्यक्ति -विशेष का कोई गुण प्रभावित कर जाये तो ग्रहण करने का पूरा यत्न करते है और उसे जीवन में उतार कर उसका दैनिक जीवन में प्रयोग इनकी विशेषता होती है। उन्हें अपनी स्वार्थसिद्धि का ध्यान तो रहता है परन्तु स्वार्थसाधन में दुसरो की हानि करने से घबराते है ।ऐसे व्यक्ति को समाज में प्रतिष्ठा भी मिलती है और ज्यों -ज्यों इनका जीवन आगे बढ़ता है, इनके पास पैसा ,सम्मान और घर में भी बढ़ोतरी होती रहती है । प्रौढ़ावस्था में ऐसे व्यक्ति अपेक्षकृत अधिक सुख पाए जाते है ।

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‘एस’ अक्षर की अंक संख्या तीन है
S (एस )-जिन व्यक्तियों का नाम अंग्रेजी के एस अक्षर से शुरू होता है ,वे बहुर्मुखी होते है ।उन्हें मित्र बनाने की कला का ज्ञान होता है तथा वे हंसमुख और निपुण होता है । दुसरो से किस प्रकार लाभ उठाया जाये , इस बात को वे अच्छी तरह जानते है तथा नाटकों, समाराहों, रंगमंच, सार्वजनिक प्रदर्शनो और उत्सवों में आएगी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते है ।आधिकारिक व्यक्तियों में सम्पर्क बढ़ाने का यत्न रहता है ।ऐसे व्यक्ति अपने अफसर या मालिक को खुश रखते है और उनके प्रति वफादार भी होते है । वे भी उनके कार्यो से संतुष्ट और उनकी ओर विशेष रूप से आकृष्ट रहते है ।यह सब कुछ होने के बावजूद ऐसे व्यक्ति किसी बात का शीघ्र निर्णय नहीं कर सकते ओर इसी उहापोह में रहते है की यह करू या वह करू ,करुं या न करुं । ऐसी अवस्था में मित्र लोग जो परामर्श दे देते है , वे वही कर लेते है। स्वतंत्र निर्णय लेना उनके लिए कठिन ही होता है ।

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‘टी’ अक्षर की अंक संख्या चार है
T (टी )- जिन व्यक्तियों का नाम अंग्रजी के टी अक्षर से शुरू होता है, वे संतोषमृत तृप्ताना का उदहारण होते है यानि संतोषवृति उनमे कूट -कूट के भरी होती है । ऐसे व्यक्ति अपने उन्नति के लिए कोई भी गलत तरीका इश्तेमाल नहीं करते है न्याय ओर विवेक के आधार पर चलकर ही उन्नत ओर सुखी होना चाहते है । उन्हें अपने आप पर ओर अपनी योग्यता पर पूरा भरोसा होता है । यही उनका विशेष गुण होता है । किसी के दबाव में आकर वे अपना मत नहीं बदलते । एक बार निश्चय क्र लेने पर बदलना उनके लिए कठिन हो जाता है । ये उस पर अटल रहते है । ये अपने परिचितों तथा मित्रो में काफी लोकप्रिय होते है ओर उन्हें अपनी प्रश्नता का भागीदार भी बनाना चाहते है ,जबकि कष्टों ओर मानसिक यातनाओ को अकेले ही सहन करने को तैयार रहते है । सब कुछ प्रभु की कृपा मान कर उसमे पूरी आस्थ रखते हुए जीवन बिताते है । इस बात के लिए तर्क नहीं करते । प्रभुभक्ति ,स्वामिभक्ति,ओर देशभक्ति उनके अद्भुत गुण होते है ।

क्या बताता है आपके नाम का पहला शब्द ‘L’ से ‘O’ तक

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अगर आपके नाम का पहला अक्षर

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‘एल’ अक्षर की अंक संख्या ‘तीन’ है
L (एल )- जिन व्यक्तियों के नाम का आरम्भ एल अक्षर से होता है,वे प्राय भावुक और दार्शनिक प्रवृति के होते है । उनके विचार सुलझे हुए होते है और वे अपने कार्यो से श्रेष्ट होते है । ऐसे व्यक्ति स्थिर प्रकृति -जिसे रिज़र्व नेचर कह सकते है , के हो सकते है और अपना सारा कार्य योजनाबद ढंग से कर सकते है । ऐसे व्यक्ति अपने हाल में मस्त,अपनी धुन के पक्के तथा अपने काम में लगे रहते है । उन्हें न पीछे को घूमकर देखने की फुर्सत होती है , न आदत । अपनी इस धुन के कारण एक दिन अवसय ही उच्च पद पर पहुंच जाते है । प्राय उनका पद और कार्य गरिमपूर्ण होता है । साधारण पद या कार्य उन्हें पसंद नहीं होते ।
‘एम्’ अक्षर की अंक संख्या चार है

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M (एम् )-जिन व्यक्तियों का नाम अंग्रेजी के एम् अक्षर से आरम्भ होता है वे सदाचारी ,सभ्य और सुसंस्कृत होते है तथा सादा रहते है । उनकी यह ज़िन्दगी ही उन्हें कई बार हानि पहुंचा देती है और उनके लिए अभिशाप बन जाती है । उनके विचार पवित्र रहते है इसलिए वे खरी खरी कहने से नहीं चूकते । वे गोपनीय बनने का प्रयत्न तो करते है परन्तु बहिर्मुखी प्रवृति के होने के कारण गोपनीय बातें भी उनके मुख से निकल जाती है । इसके बावजूद उनके चारो और रहस्य के पर्दा सा बना रहता है जिस से उनके परिवार वाले तथा अन्य लोग भी उनके निर्धन -जैसा होने पर भी उन्हें धनवान ही समझते है । उनके प्रति इस भ्र्म का कारण यह होता है की वे हर बात में, हर काम में अपना बड़प्पन प्रदर्शित करने का प्रयत्न करते है । ऐसे व्यक्ति श्रेष्ट तो होते है परन्तु अपने आपको श्रेष्ट करने की प्रवृति भी इनमे कूट -कूट के भरी रहती है ।
‘एन’ अक्षर की अंक संख्या ‘पांच’ होती है

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N (एन )-जिन व्यक्तियों का नाम अंग्रेजी के एन अक्षर से आरम्भ होता है , बाधाये और कठिनाइया भी उनके जीवन के साथ साथ चलती है । उनका जीवन संघर्षमय होता है और पग-पग पर रुकावटें भी आती है परन्तु अपने दृढ़ और प्रभावशाली व्यक्तित्व के कारण वे कठिनाइयों को पार करते हुए अपनी रह बना ही लेते है । इस प्रकार ऐसे व्यक्ति चलते चलते अपने लक्ष्य तक पहुंच जाता है ।अपने व्यक्तित्व के कारण ही अपरिचित व्यक्ति को भी अपना मित्र बना लेना उनके लिए कठिन नहीं होता । वे यह प्रयत्न भी करते है की उनकी मित्रता आयु भर निभ जाये ।ऐसे व्यक्ति को सदगृहस्त कहा जा सकता है kyonki अनेक कष्ट सह कर भी अपने परिवार को उन्नत बनाने के यत्न करते है ।परिवार को उन्नत बनाने का विचार कभी ओझल नहीं होता । सरल और सादगीपूर्ण जीवन , श्रेष्ट विचार सभी से सहयोग और सम्मान पूर्ण व्यवहार एंव आत्मसम्मान उनके विशिष्ट गुण होते है ।

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‘ओ’ अक्षर की अंक संख्या सात है
O ( ‘ओ’ ) -जिन व्यक्तियों का नाम अंग्रेजी के ओ अक्षर से शुरू होता है वे प्राय आत्मसीमित( सेल्फ-सेण्टरेड ) होते है । उन्हें सहस और दिलेरी का प्रतिनिधि कहा जाता है ।जीवन में उत्तर चढ़ाव आने के बावजूद भी ऐसे व्यक्ति न तो साहस छोड़ते है और न ही हिम्मत हारते है । एक बार निचे गिरने पर भी साहस और हिम्मत से ऊपर उठने का यंत्र करते है और सफल भी हो जाते है । उनके मित्र भी बहुत होते है , पर शत्रु भी कम नहीं होते ।जो व्यक्ति उनके मित्र रह चुके होते है , उनमे से ही प्राय बहुत से उन्हें धोका देने की कोशिश करते है । संकुचित विचारो का लबादा उन पर टिक नहीं पता अर्थात संकुचित विचार उन्हें पसंद नहीं होते । ये गीली सुलगती लकड़ी की तरह जीवन बिताना नहीं चाहते बल्कि शोले की तरह भभकर चमकना पसंद करते है । फिर चाहे वह चमक क्षणभर ही क्यों न हो पर उनकी इच्छा यही होती है की वे चमककर दुसरो को एक बार चकाचोंध करे ।उनमे महत्वकांक्षा बहुत होती है और ये उन्हें जल्दी ही पूरा करना चाहते है ।ऊँचा उठने की उन्हें बहुत कामना होती है उनके जीवन का अंतिम भाग अपेक्षाकृत कम जल्दबाजी से भरा होता है तथा सुखी और सम्पन्न होता है ।